जीवन में सफलता चाहते है तो जरूर जाननी चहिये विवेकानंद की ये बाते - Go Sarkari

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Wednesday, 2 March 2016

जीवन में सफलता चाहते है तो जरूर जाननी चहिये विवेकानंद की ये बाते


जीवन में सफलता चाहते है तो जरूर जाननी चहिये विवेकानंद की ये बाते
दोस्तों, यदि आप जीवन में जल्द सफलता प्राप्त करना चाहते है तो आपके लिए स्वामी विवेक नन्द जी की बातों पर अवश्य ही फोकस करना चाहिए जिसके द्वारा आपको सफलता की ओर अग्रसर  होने में मदद प्राप्त होगी और आप अपने जीवन में एक सफल व्यक्ति के रूप में पहचान बनाने में सफल हो पाएंगे | स्वामी विवेक नन्द की बातों के अनुसरण करने मात्र से ही जीवन में सफलता मिल सकती है | 


                      


वर्तमान समय में भी बहुत से युवा; स्वामी विवेकानंद जी की बातों का अनुसरण करते हैं तथा उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को अपने जीवन में ग्रहण करने के प्रयास में जुटे हुए है। युवाओं में सबसे अधिक लोकप्रिय स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं की जिज्ञासाओं का समय-समय पर बहुत ही सरलता और तर्क संगत के द्वारा समाधान किया है। 


जिससे युवाशक्ति को जीवन में सफलता पाने हेतु विशेष बल की प्राप्ति भी हुई है | स्वामी विवेक नन्द जी के अनेको बातें आज भी हम सभी के लिए एक नई दिशा प्रदान करते हैं। ऐसे ही कुछ बातें आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आप सबसे साझा करने जा रहे हैं जिनको जीवन में ग्रहण करने से आप जरूर सफलता प्राप्त कर सकने में कामयाब हो पाएंगे |

स्वामी विवेकानंद , जिनके नाम का अनुसरण करने मात्र से ही मन में श्रद्धा और स्फूर्ति दोनों का संचार एक साथ होने लगता है। श्रद्धा इसलिये, क्योंकि उन्होंने भारत के नैतिक एवं जीवन मूल्यों को संसार के सभी कोनों तक पहुंचाया और स्फूर्ति इसलिये क्योंकि इन मूल्यों से जीवन में एक नई दिशा प्राप्त होती है। यदि उन्होंने यह सबकुछ किया है तो उनके जीवन से हमें भी शिक्षा लेनी चाहिए जिससे हम जीवन में कामयाबी हासिल कर सकें |स्वामी विवेक नन्द जी की बातें कुछ इस प्रकार है |


स्वामी विवेकानंद जी की महत्वपूर्ण बातें-

·        उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये।

·        तमाम संसा हिल उठता। क्या करूँ धीरे-धीरे अग्रसर होना पड़ रहा है। तूफ़ान मचा दो तूफ़ान!

·        जब तक जीना, तब तक सीखना' -- अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।

·        पवित्रता, दृढ़ता तथा उद्यम- ये तीनों गुण मैं एक साथ चाहता हूँ।

·        ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है।

·        जब कोई विचार अनन्य रूप से मस्तिष्क पर अधिकार कर लेता है तब वह वास्तविक भौतिक या मानसिक अवस्था में परिवर्तित हो जाता है।

·        आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है। उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो।

·        हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है, और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है।

·        लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्मी तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहान्त आज हो या एक युग मे, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।

·        तुम अपनी अंत:स्थ आत्मा को छोड़ किसी और के सामने सिर मत झुकाओ। जब तक तुम यह अनुभव नहीं करते कि तुम स्वयं देवों के देव हो, तब तक तुम मुक्त नहीं हो सकते।

दोस्तों, स्वामी विवेक नन्द जी एक बहुत ही सफल व्यक्ति रहे है इस आर्टिकल के माध्यम से बताई गई उनकी बातों से अब आप अपने जीवन में सफलता पाने में अवश्य कामयाब हो पाएंगे |



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